आज तेरे घर के आगे से गुज़रा

आज तेरे घर के आगे से गुज़रा
यूँ तो वहां से गुज़ारना कोई अनोखी बात नहीं थी
पर उस एहसास को महसूस करना कोई इत्तेफ़ाक़ भी नहीं
वही डर कि कोई देख तो नहीं रहा
वही बदन के रौंगटे खड़े हो जाना Continue reading