सुराही

चेतावनी- आधुनिकता का रंगीन चश्मा उतार कर पढे।

दफ़्तर के लिये निकलने से पहले माता जी को आज भी कॉल कर लेता हूं। ये प्रक्रिया उस समय से चली आ रही है जब इंजीनियरिंग के दौरान हॉस्टल मे था। और फिर क्या आशिर्वादों की अनन्त श्रिंखला , हर दिन के लिये कुछ सुझाव , और् “हमार बाबु लिखल ना रोकिह्” ।
अभी रेफ़्रिजेरटर के पानी से प्यास बुझी भी नही कि ९० के दसक की बात याद आ जाती है , जब हम दादी के साथ गर्मी शुरू होते ही सुराही खरीदने चले जाते थे।उस सुराही का पानी बडा ही अनमोल होता था, मीठा गले को सुकून देने वाला और खराश भी नही होती थी। पूरी गर्मी के लिये वो सुराही ही हमारा रेफ़्रिजेरटर होता था।
इस सुराही का बहुत उपकार है। अपने इसी हमदर्द पर कुछ पंक्तियां लिख रहा हूं—- Continue reading

Aisi gehraiyan aisi tanhaiyan | Zindagi na milegi dobara

Aisi Gehraiyan Aisi Tanhaiyan | Poets Arena
पिघले नीलम सा बहता हुआ ये समा
नीली-नीली सी खामोशियाँ
ना कहीं है ज़मीन, ना कहीं आसमान
सरसरती हुई टहनियाँ, पत्तियाँ
कह रहीं है की बस एक तुम हो यहाँ
सिर्फ़ मैं हूँ
मेरी साँसें हैं और मेरी धड़कनें
ऐसी गहराइयाँ, ऐसी तनहाईयाँ
और मैं सिर्फ़ मैं
अपने होने पर मुझको यक़ीन आ गया

Chasing Shadows

A sea has been drowned into a river!
Let it be an empty space forever!
Need of an hour is to accept the reality!
Relying upon words would be insanity!
Words aren’t enough to project this grief!
Still they’re lost in nostalgia with staggered belief!
Urge to have a blotless life!
Commitments are asking them to survive! Continue reading